लुधियाना में ढाई साल की बच्ची को जिंदा दफनाने के मामले में हाईकोर्ट ने दोषी महिला की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक, महिला को अब 30 साल जेल में रहना होगा और इस अवधि के दौरान उसे किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी। करीब दो साल पहले सेशन कोर्ट ने मामले में दोषी महिला को फांसी की सजा सुनाई थी।
बच्चों के लिए खिलौने लाने से थी रंजिश
मामले के मुताबिक, बच्ची के पिता अपने बच्चों के लिए खिलौने और दूसरी चीजें लेकर आते थे। पड़ोस में रहने वाली महिला के बच्चे भी उन्हें देखकर ऐसी चीजों की मांग करते थे। महिला इन मांगों को पूरा नहीं कर पाती थी। इसी बात को लेकर उसके मन में बच्ची के परिवार के प्रति रंजिश पैदा होने की बात सामने आई थी।
एक्टिवा पर बैठाकर सुनसान जगह ले गई थी
28 नवंबर 2021 को महिला बच्ची को एक्टिवा पर बैठाकर एल्डिको के पास एक सुनसान जगह पर ले गई। पुलिस जांच में सामने आया कि महिला ने वहां पहले से ही एक गड्ढा खोद रखा था। आरोप है कि उसने बच्ची को उसी गड्ढे में जिंदा दफना दिया। बच्ची के लापता होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। CCTV फुटेज में महिला बच्ची को अपने साथ ले जाती हुई दिखाई दी, जिसके आधार पर पुलिस ने उससे पूछताछ की।
पूछताछ में कबूला जुर्म, निशानदेही पर बरामद हुई बच्ची
पुलिस पूछताछ के दौरान महिला ने बच्ची को दफनाने की बात कबूल की। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने बच्ची को बरामद किया। मामले की जांच के बाद आरोपी महिला के खिलाफ अदालत में केस चला। करीब दो साल पहले सेशन कोर्ट ने महिला को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद महिला अदालत में रोने लगी और उसने जज से रहम की गुहार लगाते हुए कहा था, “जज साहब, प्लीज मुझे बख्श दो। मेरे भी दो बच्चे हैं।” हालांकि, उस समय सेशन कोर्ट ने सजा में कोई नरमी नहीं बरती थी।
हाईकोर्ट ने फांसी की सजा बदली
अब हाईकोर्ट ने मामले में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। अदालत के आदेश के अनुसार दोषी महिला को 30 साल की जेल की सजा भुगतनी होगी और इस अवधि में उसे किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी।









