त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की जेब पर महंगाई की मार पड़ी है। देश की जानी-मानी डेयरी ब्रांड ‘अमूल’ ने दिवाली से ठीक पहले घी और बटर (मक्खन) की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। त्योहारों के मौके पर मिठाइयां और पारंपरिक पकवान बनाने की तैयारी कर रहे परिवारों के लिए यह फैसला बजट बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है। एक तरफ जहां कीमतें बढ़ाई गई हैं, वहीं दूसरी ओर गुजरात के कई प्रमुख शहरों में अमूल के गाय के घी की कमी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
अमूल घी और बटर की नई दरें लागू
अमूल ने अपने अलग-अलग साइज के पैकेटों की दरों में बढ़ोतरी की है। 1 किलो घी के कार्टन पैक पर सीधे 50 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद इसकी कीमत 630 रुपए से बढ़कर 680 रुपए हो गई है। वहीं 500 ग्राम प्योर घी पाउच की कीमत 325 रुपए से बढ़ाकर 345 रुपए तय की गई है।
मक्खन (बटर) के दामों में भी उछाल आया है। 100 ग्राम बटर अब 63 रुपए के बजाय 66 रुपए में मिलेगा। इसके अलावा 500 ग्राम वाले बटर पैक की कीमत 310 रुपए से बढ़ाकर 325 रुपए कर दी गई है।
जानिए क्यों महंगी हुई डेयरी प्रोडक्ट्स की कीमतें?
कंपनी और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में इस उछाल का मुख्य कारण त्योहारी सीजन में मांग का अचानक बढ़ना और सप्लाई पर दबाव होना है। इसके अलावा, हाल के महीनों में गुजरात और राजस्थान में नकली व मिलावटी घी के खिलाफ व्यापक स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले छह महीनों में करीब 2 लाख किलो नकली घी जब्त किया गया है। इस कार्रवाई के बाद आम ग्राहकों का भरोसा ब्रांडेड घी की तरफ तेजी से बढ़ा है, जिससे अमूल घी की मांग में भारी इजाफा हुआ है।
गुजरात में गाय के घी की किल्लत
दाम बढ़ने के साथ-साथ बाजारों में अमूल के गाय के घी की उपलब्धता को लेकर भी परेशानियां देखी जा रही हैं। अहमदाबाद और वडोदरा जैसे बड़े शहरों के कई इलाकों में अमूल गाय के घी की किल्लत की खबरें आई हैं। स्थानीय अमूल पार्लर संचालकों का कहना है कि मांग की तुलना में उन्हें काफी कम स्टॉक मिल रहा है। इससे पहले पुणे, कोलकाता और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों से भी सप्लाई चेन से जुड़ी शिकायतें दर्ज की गई थीं।
GST कटौती से मिली राहत हुई बेअसर
सितंबर 2025 में सरकार द्वारा डेयरी उत्पादों पर जीएसटी की दरें 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई थीं, जिसके बाद अमूल ने अपने कई उत्पादों के दाम घटाए थे। हालांकि, दिवाली से ठीक पहले घी और बटर की दरों में हुई इस ताजा बढ़ोतरी ने जीएसटी कटौती से मिली उस राहत को पूरी तरह से बेअसर कर दिया है। त्योहारी माहौल के बीच महंगे उत्पादों के साथ-साथ सप्लाई की कमी से आम ग्राहकों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।









