हिमाचल प्रदेश को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से बिजली में हिस्सेदारी के लंबे समय से लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट से ऐतिहासिक राहत मिली है। राज्य के एडवोकेट जनरल अनूप रत्न ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 1996 में दायर किए गए सिविल सूट की लंबी कानूनी लड़ाई में आखिरकार हिमाचल प्रदेश की जीत हुई है। अदालत ने हिमाचल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 11,973 मिलियन यूनिट बिजली (एरियर के रूप में) देने का स्पष्ट आदेश जारी किया है। यह बकाया बिजली प्रदेश को अगले 20 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से मिलती रहेगी।
हर साल मिलेगी 600 करोड़ यूनिट बिजली, आर्थिक स्थिति को मिलेगा बल
एडवोकेट जनरल अनूप रत्न ने फैसले के आर्थिक पहलुओं को साझा करते हुए बताया कि इस निर्णय से हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी। यह बिजली विशेष रूप से अक्टूबर से मार्च के महीनों के दौरान उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मार्च से अक्टूबर के बीच बाजार में बिजली के दर (रेट) काफी अच्छे और प्रतिस्पर्धी होते हैं, जिससे राज्य इस फैसले के माध्यम से और अधिक राजस्व अर्जित करने में सक्षम होगा।









